मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में जिस नए राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दौर की शुरुआत हुई, उसे मौर्योत्तर काल कहा जाता है। इस काल में शुंग, कण्व और सातवाहन जैसे देशी वंशों के साथ-साथ शक, पहलव और कुषाण जैसे विदेशी वंशों का उदय हुआ।
यह काल प्रशासन, धर्म, कला, व्यापार और सिक्का प्रणाली के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यहाँ प्रस्तुत नोट्स UPSC, SSC, रेलवे, राज्य PCS, NDA, CDS एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
मौर्योत्तर काल नोट्स और प्रशन
1. शुंग वंश (185–73 ई.पू.)
:- मौर्य वंश के अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की।
:- इसी घटना के बाद 185 ई.पू. में शुंग वंश की स्थापना हुई।
:- शुंग वंश की राजधानी पाटलिपुत्र थी।
:- पुष्यमित्र शुंग मूल रूप से ब्राह्मण था।
:- पुष्यमित्र शुंग ने अपनी शक्ति को वैध ठहराने के लिए दो अश्वमेध यज्ञ कराए।
:- शुंग काल में ब्राह्मण धर्म का पुनरुत्थान हुआ।
:- बौद्ध धर्म के प्रति शुंग शासकों की नीति को लेकर मतभेद हैं। कुछ स्रोतों में बौद्ध विहारों के विनाश का उल्लेख मिलता है।
:- शुंग काल में यवन (यूनानी) आक्रमण हुए।
:- पुष्यमित्र शुंग ने यवनों को अयोध्या और मध्य भारत में रोका।
:- शुंग शासकों के समय साँची और भरहुत स्तूपों का पुनर्निर्माण व विस्तार हुआ।
:- शुंग कला में लकड़ी की नकल करने वाली पत्थर की संरचनाएँ मिलती हैं।
:- शुंग काल की कला को शुंग कला शैली कहा जाता है।
:- इस काल में संस्कृत भाषा को संरक्षण मिला।
:- महान व्याकरणाचार्य पतंजलि ने महाभाष्य की रचना की।
:- शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति था।
:- देवभूति अयोग्य शासक था।
:- देवभूति की हत्या उसके मंत्री वासुदेव कण्व ने कर दी।
:- इसी के साथ शुंग वंश का अंत हुआ।
2. कण्व वंश (73–28 ई.पू.)
:- कण्व वंश की स्थापना वासुदेव कण्व ने 73 ई.पू. में की।
:- वासुदेव कण्व शुंग शासक देवभूति का मंत्री था।
:- कण्व वंश की राजधानी भी पाटलिपुत्र रही।
:- कण्व वंश का शासन मुख्यतः मगध क्षेत्र तक सीमित था।
:- कण्व वंश के शासक थे –
:- वासुदेव कण्व
:- भूमिमित्र
:- नारायण
:- सुशर्मा (अंतिम शासक)
:- कण्व वंश का शासन काल लगभग 45 वर्ष रहा।
:- कण्व शासक राजनीतिक रूप से कमजोर थे।
:- इस काल में केंद्रीय सत्ता कमजोर हो गई।
:- उत्तर भारत में अशांति बढ़ने लगी।
:- कण्व वंश के समय कोई विशेष सांस्कृतिक उपलब्धि नहीं मिलती।
:- दक्षिण भारत में इस समय सातवाहन वंश शक्तिशाली हो चुका था।
:- कण्व वंश का अंत सातवाहन शासक सिमुक ने किया।
3. सातवाहन वंश (लगभग 1 ई.पू.–3 ई.)
:- सातवाहन वंश की स्थापना सिमुक ने की।
:- सातवाहन वंश को आंध्र वंश भी कहा जाता है।
:- यह दक्षिण भारत का पहला शक्तिशाली देशी राजवंश माना जाता है।
:- सातवाहनों की राजधानी प्रतिष्ठान (पैठण, महाराष्ट्र) थी।
:- सातवाहन वंश का क्षेत्र महाराष्ट्र, आंध्र, तेलंगाना और मध्य भारत तक फैला था।
प्रमुख शासक
:- सिमुक – संस्थापक शासक।
:- सातकर्णि – साम्राज्य का विस्तार किया।
:- गौतमीपुत्र सातकर्णि – सबसे महान शासक।
:- वाशिष्ठीपुत्र पुलुमावी – प्रशासन को मजबूत किया।
गौतमीपुत्र सातकर्णि
:- गौतमीपुत्र सातकर्णि ने शक, यवन और पहलवों को पराजित किया।
:- उसने शक शासक नहपान को हराया।
:- उसे ब्राह्मणों का संरक्षक कहा गया है।
:- उसने वर्ण व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास किया।
:- उसकी उपलब्धियों का उल्लेख नासिक प्रशस्ति में मिलता है।
प्रशासन व समाज
:- सातवाहन शासक मातृनाम का प्रयोग करते थे।
:- प्रशासन में सामंतों की भूमिका बढ़ी।
:- भूमि दान की परंपरा प्रारंभ हुई।
:- व्यापारियों और श्रेणियों को संरक्षण मिला।
धर्म व संस्कृति
:- सातवाहन शासक ब्राह्मण थे।
:- उन्होंने बौद्ध धर्म को भी दान दिया।
:- बौद्ध विहारों और चैत्यगृहों का निर्माण हुआ।
:- अमरावती, नासिक और कार्ले की गुफाएँ इसी काल की हैं।
:- सातवाहन काल में अमरावती कला शैली का विकास हुआ।
अर्थव्यवस्था
:- रोमन साम्राज्य से व्यापार होता था।
:- सोने-चाँदी के सिक्के प्रचलन में थे।
:- बंदरगाहों से विदेशी व्यापार विकसित हुआ।
:- सातवाहन वंश के पतन के बाद दक्षिण भारत में छोटे-छोटे राज्य उभर आए।
4. शक (Shaka)
:- शक मध्य एशिया से भारत आए विदेशी आक्रमणकारी थे।
:- इन्हें सीथियन (Scythians) भी कहा जाता है।
:- भारत में शक शासन मुख्यतः पश्चिम भारत में स्थापित हुआ।
:- शक शासकों को क्षत्रप कहा जाता था।
:- क्षत्रप दो प्रकार के होते थे –
:- महाक्षत्रप
:- क्षत्रप
:- शक शासकों ने सौराष्ट्र, मालवा और गुजरात में शासन किया।
:- शक शासक रुद्रदामन प्रथम सबसे प्रसिद्ध था।
:- रुद्रदामन प्रथम का जूनागढ़ अभिलेख अत्यंत महत्वपूर्ण है।
:- जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत भाषा का पहला प्रमुख शिलालेख माना जाता है।
:- रुद्रदामन ने सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण कराया।
:- शक शासकों ने भारतीय संस्कृति को अपनाया।
:- शक काल में शक संवत (78 ई.) की शुरुआत मानी जाती है।
:- शक शासकों ने चाँदी के सुंदर सिक्के चलाए।
:- शक शासन के पतन के बाद उनका क्षेत्र गुप्तों के अधीन चला गया।
5. पहलव (Parthians)
:- पहलव मूल रूप से पार्थिया (ईरान क्षेत्र) से आए थे।
:- इन्हें इंडो-पार्थियन भी कहा जाता है।
:- भारत में पहलवों का शासन उत्तर-पश्चिम भारत में रहा।
:- पहलव शासकों का शासन काल छोटा था।
:- भारत में पहलवों का सबसे प्रसिद्ध शासक गोंडोफर्नेस था।
:- ईसाई परंपरा के अनुसार संत थॉमस गोंडोफर्नेस के समय भारत आए।
:- पहलवों ने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को अपनाया।
:- पहलव काल में कोई स्वतंत्र कला शैली विकसित नहीं हुई।
:- उनका शासन शक और कुषाण काल के बीच का संक्रमण काल माना जाता है।
:- अंततः पहलव शासक कुषाणों द्वारा पराजित कर दिए गए।
6. कुषाण वंश (लगभग 1–3 ई.)
उत्पत्ति व स्थापना
:- कुषाण मूलतः यू-ची (Yuechi) जाति से संबंधित थे।
:- यू-ची पहले चीन क्षेत्र में रहते थे।
:- बाद में वे मध्य एशिया होते हुए भारत आए।
:- भारत में कुषाण वंश की स्थापना कुजुल कडफिसेस ने की।
:- कुषाणों की राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) थी।
प्रमुख कुषाण शासक
:- कुजुल कडफिसेस
:- विम कडफिसेस
:- कनिष्क (महानतम शासक)
:- हुविष्क
:- वासुदेव
कनिष्क (सबसे महत्वपूर्ण)
:- कनिष्क कुषाण वंश का सबसे महान शासक था।
:- कनिष्क का राज्यारोहण 78 ई. में माना जाता है।
:- कनिष्क के शासन से शक संवत की शुरुआत मानी जाती है।
:- कनिष्क का साम्राज्य मध्य एशिया से गंगा घाटी तक फैला था।
:- कनिष्क ने पुरुषपुर को राजधानी बनाया।
धर्म नीति
:- कनिष्क प्रारंभ में सूर्य और ईरानी देवताओं का उपासक था।
:- बाद में उसने बौद्ध धर्म अपना लिया।
:- कनिष्क को बौद्ध धर्म का महान संरक्षक कहा जाता है।
:- कनिष्क के संरक्षण में चतुर्थ बौद्ध संगीति हुई।
:- चतुर्थ बौद्ध संगीति कुंडलवन (कश्मीर) में आयोजित हुई।
:- इस संगीति की अध्यक्षता वसुमित्र ने की।
:- उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।
:- इस संगीति में बौद्ध ग्रंथों की टीकाएँ तैयार की गईं।
:- इसी काल में महायान बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ।
कला व संस्कृति
:- कुषाण काल को स्वर्ण युग कहा जाता है।
:- इस काल में गांधार कला शैली का विकास हुआ।
:- गांधार कला में बुद्ध की मानव मूर्तियाँ बनाई गईं।
:- गांधार कला पर ग्रीक प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
:- साथ ही मथुरा कला शैली का भी विकास हुआ।
:- मथुरा शैली में लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग हुआ।
:- कुषाण काल में पहली बार बुद्ध की मूर्तियाँ बनाई गईं।
साहित्य
:- कनिष्क के दरबार में महान विद्वान रहते थे।
:- अश्वघोष कनिष्क का दरबारी कवि था।
:- अश्वघोष की प्रसिद्ध रचनाएँ –
:- बुद्धचरित, सौंदरानंद
:- नागार्जुन इसी काल के महान दार्शनिक माने जाते हैं।
प्रशासन
:- कुषाण शासक दैवी अधिकार में विश्वास करते थे।
:- राजा को देवताओं का प्रतिनिधि माना जाता था।
:- प्रशासन में सैन्य शक्ति का विशेष महत्व था।
:- सामंत प्रथा का प्रारंभिक रूप दिखाई देता है।
अर्थव्यवस्था व व्यापार
:- कुषाण काल में अंतरराष्ट्रीय व्यापार अपने चरम पर था।
:- रेशम मार्ग (Silk Route) कुषाणों के नियंत्रण में था।
:- रोम, चीन और मध्य एशिया से व्यापार होता था।
:- कुषाण शासकों ने सोने के सर्वाधिक सिक्के चलाए।
:- व्यापारियों और श्रेणियों को संरक्षण मिला।
मौर्योत्तर काल से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न:-
Q.1 मौर्य वंश के बाद मगध में किस वंश की स्थापना हुई - शुंग वंश (पुष्यमित्र शुंग द्वारा)
Q.2 पुष्यमित्र शुंग ने किसे अपनी राजधानी बनाया - उज्जयिनी (विदिशा)
Q.3 महान योग ऋषि "पतंजलि" का संबंध किस वंश से है - शुंग वंश (पुष्यमित्र के दरबार में)
Q.4 यूनानी शासक "मिनांडर" को किसने पराजित किया था - वसुमित्र
Q.5 शुंग वंश का अंतिम शासक कौन था - देवभूति
Q.6 मनुस्मृति, विष्णु स्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति जैसे ग्रंथों की रचना किस काल में हुई - शुंग वंश
Q.7 पाणिनि की अष्टाध्यायी टीका "महाभाष्य" किसने लिखी - पतंजलि
Q.8 शुंग वंश के अंतिम शासक देवभूति की हत्या कर किसने कण्व वंश की नींव रखी वसुदेव
Q.9 विष्णु भगवान को समर्पित "गरुण स्तंभ" किसने बनवाया - हेलियोडोरस ने
Q.10 ब्राह्मण धर्म का पुनर्जागरण काल किस काल को कहा जाता है - शुंग वंश
Q.11 सातवाहन वंश की शुरुआत किसने की - सिमुक ने (सुशर्मा की हत्या करके)
Q.12 सातवाहनो की राजधानी कहां थी - प्रतिष्ठान/पैठन (महाराष्ट्र में गोदावरी के किनारे)
Q.13 ब्राह्मणों को भूमि अनुदान देने की प्रथा किसने आरम्भ की - सातवाहनो ने
Q.14 आंध्रभृत्य किन्हें कहा जाता था - सातवाहनो को
Q.15 सातवाहन वंश का सबसे प्रभावशाली शासक कौन था - गौतमी पुत्र शातकर्णी
Q.16 दक्षिणापथपति की उपाधि किसने धारण की - गौतमी पुत्र शातकर्णी ने
Q.17 सातवाहनो की राजकीय भाषा क्या थी - प्राकृत (ब्राह्मी लिपि)
Q.18 सीसे के सिक्कों का प्रचलन भारत में पहली बार किसने शुरू किया - सातवाहनो ने
Q.19 "शक" मूलतः किस देश के निवासी थे - सीरिया
Q.20 शकों का सबसे प्रतापी राजा कौन था - रुद्रदामन (गुजरात शाखा में)
Q.21 किस शक शासक ने सुदर्शन झील का पुनरुद्धार/जीर्णोद्धार कराया - रुद्रदामन ने (गुजरात के गिरनार पर्वत पर जूनागढ़ क्षेत्र में स्थित है, इसे चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में उनके गवर्नर पुष्यगुप्त ने बनवाया था।
Q.22 संस्कृत भाषा का पहला अभिलेख किसने जारी किया - रुद्रदामन ने (गिरनार अभिलेख)
Q.23 कौन शासक/राजा अपने आप को भारत में "क्षत्रप" कहते थे - शक
Q.24 प्रसिद्ध ईसाई प्रचारक "सेंट थॉमस" किसके काल में भारत आया था - गॉन्डोफर्नीस (पहलव)
Q.25 पहलव वंश के बाद किस विदेशी वंश ने भारत में अपने पैर जमाए - कुषाण
Q.26 कुषाण वंश की स्थापना किसने की - कुजुल कडफीशियस ने (15 ई. में)
Q.27 भारत में कुषाण शक्ति का वास्तविक संस्थापक कौन था - विम कडफीशियस
Q.28 किस कुषाण शासक ने महेश्वर की उपाधि धारण की - विम कडफीशियस (शैव अनुयाई
Q.29 महान शासक "कनिष्क" का संबंध किस वंश से है - कुषाण (78 ई. में गद्दी पर बैठा)
Q.30 कनिष्क की प्रारंभिक राजधानी क्या थी - पुरुषपुर/पेशावर (दूसरी - मथुरा)
Q.31 कनिष्क ने कहां कनिष्कपुर नामक नगर बसाया - कश्मीर में
Q.32 कनिष्क ने किस धर्म को अपनाया - बौद्ध धर्म (महायान शाखा का अनुयाई)
Q.32 प्रसिद्ध महान विद्वान चरक, अश्वघोष और वसुमित्र किसके दरबार में थे - कनिष्क
Q.33 चौथी बौद्ध संगीति किसके काल में आयोजित हुई - कनिष्क (कुंडलवन, कश्मीर में)
Q.34 चौथी बौद्ध संगीति की अध्यक्षता किसने की - वसुमित्र ने (उपाध्यक्ष - अश्वघोष)
Q.35 देवपुत्र किस कुषाण शासक की उपाधि थी - कनिष्क
Q.36. 78 ई. में शक संवत की शुरुआत किसने की - कनिष्क ने
Q.38 किस शासक को द्वितीय अशोक कहा जाता है - कनिष्क
Q.39 गांधार शैली (यूनानी +भारतीय शैली का मिश्रण) तथा मथुरा शैली का जनक - कनिष्क
Q.40 कनिष्क के दरबार में राजवैद्य कौन था - चरक
Q.41 आयुर्वेद पर लिखी गई प्रसिद्ध पुस्तक "चरक संहिता" के लेखक कौन हैं - चरक
Q.42 कनिष्क की सिर विहीन मूर्ति किस कला का उत्कृष्ट उदाहरण है - मथुरा कला का
Q.43 बुद्धचरित नामक प्रसिद्ध पुस्तक किसने लिखी - अश्वघोष ने (कनिष्क के काल में)
Q.44 भारत का आइंस्टीन किसे कहा जाता है - नागार्जुन (इन्होंने सापेक्षता का सिद्धांत दिया)
Q.45 कुषाण वंश का अंतिम शासक कौन था - वासुदेव
Q.46 भारत में सर्वप्रथम स्वर्ण मुद्राएं चलाने वाले शासक कौन थे - कुषाण
प्राचीन भारत का इतिहास (सिकंदर तथा हिंद - यवन)
Q.1 एलेक्जैंडर/सिकंदर ने भारत पर कब आक्रमण किया - 326 ई.पू.
Q.2 सिकंदर किस देश का था - मकदूनिया (मेसेडोनिया)
Q.3 326 ई.पू. में उत्तर पश्चिम भारत में सिकंदर का आक्रमण किसके काल में हुआ - नंद वंश
Q.4 नन्द वंश के किस शासक के समय सिकंदर का भारत पर आक्रमण हुआ - घनानंद
Q.5 सिकंदर और राजा पोरस (पुरु) की सेना के बीच किस नदी के तट पर युद्ध हुआ - झेलम
Q.6 सिकंदर की मृत्यु कहां हुई - बेबीलोन में
Q.7 सिकंदर के गुरु का क्या नाम था - अरस्तू
Q.8 भारत पर आक्रमण करने वाले विदेशी आक्रमणकारियों का क्रम - यवन - शक - पहलव-कुषाण
Q.9 190 ई. पू. में भारत पर आक्रमण करने वाला यूनानी कौन था - डेमेट्रियस
Q.10 डेमेट्रियस ने भारत में अपनी राजधानी किसे बनाया - शाकाल को (सियालकोट)
Q.11 हिंद यूनानी शासकों में सबसे प्रमुख राजा कौन था - मिनांडर/मिलिंद
Q.12 मिनांडर ने किस से बौद्ध धर्म की शिक्षा ली - नागसेन (नागार्जुन)
Q.13 मिनांडर के प्रश्न और नागसेन के उत्तरों का संग्रह वाली पुस्तक - मिलिंदपन्हो
Q.14 भारत में स्वर्ण सिक्को का प्रचलन किसने शुरू किया - हिंद - यवन शासकों ने ( लेकिन इन्हें नियमित तथा पूर्ण रूप से प्रचलन में लाने का श्रेय "कुषाण" शासकों को दिया जाता है)
मौर्योत्तर काल भारतीय इतिहास का वह चरण है जिसने मौर्य साम्राज्य की विरासत को आगे बढ़ाते हुए नए प्रशासनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रयोग किए।
शुंगों ने वैदिक परंपराओं को पुनर्जीवित किया, सातवाहनों ने दक्षिण भारत को राजनीतिक स्थिरता दी, जबकि कुषाणों के काल में अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बौद्ध धर्म और कला अपने शिखर पर पहुँची।
प्रतियोगी परीक्षाओं में यहां से हर बार प्रश्न पूछे जाते हैं आपको हमारे ये नोट्स और प्रश्न जरूर अच्छे लगे होंगे।
अगर आपको ये नोट्स उपयोगी लगे हों तो ब्लॉग को Follow ज़रूर करें।
कोई सवाल, सुझाव या अगला टॉपिक Comment में जरूर लिखें।
ऐसे ही Exam-Oriented GK Notes के लिए जुड़े रहें।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें