भारतीय संविधान का इतिहास, प्रकृति और विशेषताएँ
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जो भारत की शासन व्यवस्था, नागरिकों के अधिकार-कर्तव्य और शक्तियों के विभाजन की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
इस ब्लॉग में हम भारतीय संविधान के इतिहास, उसकी प्रकृति, प्रमुख विशेषताओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले 50 अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर को सरल और परीक्षा-उपयोगी भाषा में समझेंगे। यह सामग्री UP Police, SSC, PCS, Railway, NDA जैसी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।
भारतीय संविधान का इतिहास
:- भारत में संविधान निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से मानी जाती है।
:- इस नियम के तहत बनने वाले प्रथम गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग थे (बंगाल में) जिन्हें भारत का प्रथम गवर्नर जनरल माना जाता है।
:- इसी नियम के अंतर्गत 1774 में कोलकाता में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई जिसके मुख्य न्यायाधीश सर ऐलिजाह एम्पे बने थे तथा तीन अन्य न्यायाधीश भी थे।
:- 1813 के चार्टर के तहत ब्रिटिश सरकार द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत से व्यापार करने का एक अधिकार छीन लिया गया तथा चीन के साथ चाय के व्यापार का एक अधिकार 20 वर्षों के लिए दे दिया गया।
:- 1833 के चार्टर अधिनियम के तहत कंपनी के सारे व्यापारिक अधिकार समाप्त कर दिए गए अब कंपनी का काम केवल भारत में शासन करना रह गया।
:- 1833 के अधिनियम के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा और इस अधिनियम के तहत बनने वाला पहला गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक था।
:- 1858 का भारत शासन अधीनियम :-
- इस नियम के तहत कंपनी का शासन खत्म कर दिया गया और शासन सीधा ब्रिटिश तक के हाथों में चला गया।
- इस नियम के तहत भारत में उत्तरदाई शासन की शुरुआत हुई तथा ब्रिटिश संसद में एक नया पद भारत सचिव बनाया गया।
:- इस नियम के तहत गवर्नर जनरल का नाम बदलकर वायसराय कर दिया गया, तथा पहला वायसराय लॉर्ड कैनिंग बना।
:- भारत में अध्यादेश जारी करने की शक्ति 1861 के भारत शासन अधिनियम के तहत शुरू हुई। लॉर्ड कैनिंग के काल में।
:- 1909 का भारत परिषद अधिनियम :-
- इस अधिनियम को मार्ले - मिंटो सुधार के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि मार्ले इंग्लैंड में भारत का राज्य सचिव था और मिंटो वायसराय था।
:- वायसराय की कार्यकारी परिषद में प्रथम भारतीय निर्वाचित सर सत्येंद्र नाथ सिन्हा बने।
:- धर्म के आधार पर पृथक निर्वाचन (भारत में सांप्रदायिक निर्वाचन) के जनक के रूप में लॉर्ड मिंटो को माना जाता है, इसमें हिंदू को हिंदू चुन सकता था तथा मुस्लिम को मुस्लिम चुन सकता था।
:- भारत शासन अधिनियम 1919 :-
इसी मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार कहा जाता है, क्योंकि मांटेग्यू सचिव था और चेम्सफोर्ड वायसराय।
- इस अधिनियम में द्वैध शासन की शुरुआत की गई क्योंकि सत्ता केंद्रीय और राज्य सूची में विभाजित कर दी गई।
- इसमें पहली बार प्रत्यक्ष निर्वाचन की व्यवस्था की गई लेकिन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नहीं था केवल 10% लोगों को ही वोट का अधिकार दिया गया (संपत्ति कर और शिक्षा के आधार पर)
- महिलाओं को भी वोट डालने का अधिकार दिया गया।
- इसमें केंद्रीय बजट को राज्य बजट से अलग किया गया।
:- भारत शासन अधिनियम 1935 :-
- भारत के संविधान बनने में सबसे अधिक महत्वपूर्ण योगदान इसी अधिनियम का रहा।
- ब्रिटिश सरकार द्वारा पेश किए गए सभी दस्तावेजों में यह सबसे बड़ा था। इसमें कुल 321 धाराएं 10 अनुसूची थीं।
- इसमें तीन सूचियां थीं
1. संघ सूची - 59 विषय
2. राज्य सूची - 54 विषय
3. समवर्ती सूची - 36 विषय
इसमें अवशिष्ट शक्तियां वायसराय के पास थी जो कि अब संसद के पास हैं।
- इस नियम के तहत प्रांतों में द्वैध शासन खत्म कर दिया गया
संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
1. लिखित और विस्तृत संविधान – प्रारंभ में 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ।
2. संघात्मक ढाँचा (Federal Framework) – केंद्र और राज्य दोनों की सरकारें।
3. एकात्मक प्रवृत्तियाँ (Unitary Features) – संकट की स्थिति में केंद्र को अधिक शक्तियाँ।
4. संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य (प्रस्तावना में उल्लेख)।
5. मौलिक अधिकार, नीति निर्देशक तत्व और मूल कर्तव्य।
6. संसदीय शासन प्रणाली (ब्रिटेन से ली गई)।
7. स्वतंत्र न्यायपालिका और न्यायिक पुनरावलोकन।
8. संविधान संशोधन की विशेष प्रक्रिया (लचीला + कठोर दोनों)।
9. समान नागरिकता और एकल नागरिकता।
10. आपातकालीन प्रावधान (राष्ट्रीय, राज्य, वित्तीय)।
11. धर्मनिरपेक्ष राज्य – सभी धर्मों को समान दर्जा।
12. संविधान का सर्वोच्चता सिद्धांत – देश का सर्वोच्च कानून।
संविधान की प्रकृति (Nature of the Constitution)
1. लिखित संविधान – भारत का संविधान पूर्ण रूप से लिखित है और विश्व के सबसे विस्तृत लिखित संविधानों में से एक है।
2. संघात्मक व्यवस्था के साथ एकात्मक झुकाव – सामान्य समय में संघात्मक, लेकिन आपातकाल में एकात्मक स्वरूप ग्रहण करता है।
3. लोकतांत्रिक प्रकृति – जनता सर्वोच्च है, शासन जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से चलता है।
4. धर्मनिरपेक्ष संविधान – राज्य का कोई धर्म नहीं है, सभी धर्मों को समान सम्मान प्राप्त है।
5. समाजवादी दृष्टिकोण – सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की स्थापना पर बल देता है।
6. न्यायिक सर्वोच्चता – संविधान सर्वोच्च है और उसकी रक्षा का दायित्व न्यायपालिका को सौंपा गया है।
7. लचीलापन एवं कठोरता का मिश्रण – कुछ प्रावधान सरल प्रक्रिया से और कुछ विशेष प्रक्रिया से संशोधित किए जाते हैं।
Nice notes sir g
जवाब देंहटाएं